इस शहर-ए-बे-चराग में जाएगी तू कहाँ,
आ ऐ शब-ए-फिराक़ तुझे घर ही लें चलें।
Iss Shahar-e-BeChiraag Mein Jayegi Tu Kahan,
Aa Ai Shab-e-Firaq Tujhe Ghar Hi Le Chalein.
मिलने से भी अजीज है मिलने की आरजू,
है वस्ल से भी जियादा मजा इंतज़ार में।
Milne Se Bhi Ajeez Hai Milne Ki Aarzoo,
Hai Vasl Se Bhi Jyada Mazaa Intezaar Mein.
कहीं वो आ के मिटा दें न इंतज़ार का लुत्फ़,
कहीं कबूल न हो जाए ये इल्तिजा मेरी।
Kahin Wo Aa Ke Mita De Na Intezaar Ka Lutf,
Kahin Qabool Na Ho Jaye Ye ilteza Meri.
दिल को मेरे इंतज़ार किसका है
Tamaam Umr Tera Intezaar