परदे की ज़रूरत ही क्या है

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तेरे हुस्न को किसी परदे की ज़रूरत ही क्या है,
कौन रहता है होश में तुझे देखने के बाद।
Tere Husn Ko Kisi Parde Ki Jarurat Hi Kya Hai,
Kaun Rehta Hai Hosh Mein Tujhe Dekhne Ke Baad.

Parde Ki Jarurat Hi Kya Hai

ये बेख्याली, ये लिबास, ये गेसू खुले हुए,
सीखी कहाँ से तुमने ये अदाएं नई नई।
Ye BeKhayali, Ye Libaas, Ye Ghesu Khule Huye,
Seekhi Kahan Se Tum Ne Ye Adaayein Nayi-Nayi.

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मेरे लफ्ज़ फीके पड़ गए तेरी अदा के सामने,
मैं तुझे ख़ुदा कह गया अपने ख़ुदा के सामने।
Mere Lafz Feeke Pad Gaye Teri Adaa Ke Saamne,
Main Tujhe Khuda Keh Gaya Apne Khuda Ke Samne.

दिल में समा गई हैं क़यामत की शोख़ियाँ,
दो-चार दिन रहा था किसी की निगाह में।
Dil Mein Samaa Gayi Hain Qayamat Ki Shokhiyan,
Do-Char Din Raha Tha Kisi Ki Nigaah Mein.

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हम तुम पे मर मिटे तो

मेरे महबूब को तुम ने देखा है

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