अपने ज़ख्मों का उजाला है

Advertisement

तेरे वादों ने हमें घर से निकलने न दिया,
लोग मौसम का मज़ा ले गए बरसातों में,
अब न सूरज, न सितारे, न शमा, न चांद,
अपने ज़ख्मों का उजाला है घनी रातों में।

Tere Vaado Ne Humein Ghar Se Nikalne Na Diya,
Log Mausam Ka Mazaa Le Gaye Barsaaton Mein,
Ab Na Sooraj, Na Sitare, Na Shama, Na Chaand,
Apne Zakhmo Ka Ujala Hai Ghani Raaton Mein.

Advertisement

अंदर टुकड़ों में मिलूंगा

Kitne Toote Hue Hain Hum

Advertisement

You may also like